“शोभा तो झूठी और सुन्दरता व्यर्थ है, परन्तु जो स्त्री यहोवा का भय मानती है, उसकी प्रशंसा की जाएगी।” (नीतिवचन 31:30)

“स्त्री” जिसे सब से कमजोर माना जाता है, और “स्त्री” खुद भी अपने जीवन का मतलब नहीं जानती। आख़िर कौन है “स्त्री”? “स्त्री” जो परमेश्वर का चुनाव थी।जब यहोवा परमेश्वर ने देखा आकाश के पक्षियों और बनैले पशुओ में कोई ऐसा सहायक न मिला जो उस से मेल खा सकें ।”तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को भारी नीन्द में डाल दिया, और जब वह सो गया तब उसने उसकी एक पसली निकाल कर उसकी जगह मांस भर दिया।और यहोवा परमेश्वर ने उस पसली को जो उसने आदम में से निकाली थी, स्त्री बना दिया; और उसको आदम के पास ले आया।”( उत्पत्ति 2:21,22)। जिसकी सृष्टि सब से अलग हैं। परमेश्वर ने एक कुंवारी “स्त्री” का गर्भ चुना था,अपने एकलौते पुत्र को इस संसार में भेजने के लिए (मत्ती.1.23)।

यीशु मसीह पुनरुथान के बाद सबसे पहले एक स्त्री को दिखाई दिये थे(युहन्ना.20:14)। यही “स्त्री” अपने जीवन में कई मनुशीक रिश्तें निभाती हैं,जैसे; बेटी, पत्नी, बहु और माँ….. इत्यादि। आईये देखे बाईबल क्या सिखाती हैं।

बेटी

“स्त्री” के जीवन का सबसे पहला किरदार होता हैं बेटी… बेटियां आपने माता- पिता की मदद करती हैं और खुद को आने वाले दिनों के लिए तैयार करती हैं (2 शमुएल. 13:7;निर्गमन. 2:16)। इतना ही नहीं उन्हे आज्ञाकारिता में बढ़ने की जरूरत है, और इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है ,एस्तेर।”एस्तेर ने अपनी जाति और कुल का पता नहीं दिया था, क्योंकि मोर्दकै ने उसको ऐसी आज्ञा दी थी कि न बताए;और एस्तेर मोर्दकै की बात ऐसी मानती थी जैसे कि उसके यहां अपने पालन पोषण के समय मानती थी”( एस्तेर 2:20)।

पत्नी

“•••आदम का अकेला रहना अच्छा नहीं; मैं उसके लिये एक ऐसा सहायक बनाऊंगा जो उससे मेल खाए। ( उत्पत्ति 2:18) परमेश्वर ने “स्त्री” को पुरुष की पसली से इसलिए बनाया ताकि वह हमेशा उसके दिल के करीब रहे, बिल्कुल एक चुंबक की तरह… और पत्नी का किरदार निभाने के लिए पवित्र शास्त्र हमे बहुत सी बाते सिखाती हैं। “••••कि अपने पतियों और बच्चों से प्रीति रखें ;और संयमी, पतिव्रता,घर का कारबार करनेवाली, भली और अपने-अपने पति के आधीन रहनेवाली हों, ताकि परमेश्वर के वचन की निन्दा न होने पाए”(तीतुस 2:4,5)। अब सवाल यह भी आता है किस प्रकार एक “स्त्री” पत्नी बने? इस के बारे में बाईबल क्या कहती हैं। “•••• वह यहोवा के वचन के अनुसार तेरे स्वामी के पुत्र की पत्नी हो जाए”( उत्पत्ति 24:51)। इस पद से स्पष्ट है, कि यहोवा की और से हर “स्त्री” पत्नी बनती हैं। लेकिन सब से महत्वपूर्ण सवाल यह है, कि प्रभु ने पति और पत्नी का रिश्ता क्यों रचा ? “पर जैसे कलीसिया मसीह के अधीन है, वैसे ही पत्नियां भी हर बात में अपने अपने पति के अधीन रहें “(इफिसियों 5:24)। क्योंकि मसीह हमारा दुल्हा हैं और हम उनकी दुल्हन हैं।”आओ, हम आनन्दित और मगन हों, और उस की स्तुति करें; क्योंकि मेम्ने का ब्याह आ पहुंचा: और उसकी दुल्हन ने अपने आप को तैयार कर लिया है”।(प्रकाशित वाक्य 19 : 7) इसका मतलब यह है कि विवाह शीघ्र होनेवाला था।मेम्ना मसीह है। मेम्ने की दुल्हिन कलीसिया अर्थात् दुल्हिन(कलीसिया) ने अपने आपको तैयार रखा है।

माँ

माँ बनना हर एक "स्त्रियों " के जीवन की अभिलाषा होती हैं, क्योंकि उनमें ममता होती हैं। "तौभी  स्त्री बच्चे जनने के द्वारा उद्धार पाएंगी, यदि वे संयम सहित विश्वास, प्रेम, और पवित्रता में स्थिर रहें"(1तीमुथियुस 2:15)।परमेश्वर ने "स्त्री" से कहा, "••• मैं तेरी पीड़ा और तेरे गर्भवती होने के दु:ख को बहुत बढ़ाऊंगा; तू पीड़ित हो कर बालक उत्पन्न करेगी;••••"(उत्पत्ति 3:16)। लेकिन परमेश्वर ही "स्त्री" को हिम्मत भी देता हैं और सिखाती है ,किस प्रकार उस बच्चे की परवरिश करे,"और ये आज्ञाएं जो में आज तुझ को सुनता हूँ वे तेरे मन में बनी रहे और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना "(व्यवस्थाविवरण 6:7-11)।"स्त्री" जब माँ बनती हैं  तब उसका उत्तरदायित्व बढ़ जाता हैं।माँ बनना अपने आप में एक आशीष है। माँ को अपने बच्चो को इस तरह तैयार करना चाहिए, कि लोग उनमें उनके माँ के विश्वास को देखे, जिस प्रकार, प्रेरित पौलुस ने तीमुथियुस की दूसरी पत्री में,तीमुथियुस की नानी लोइस और उनकी माता यूनीके का ज़िक्र किया।(2 तीमुथियुस 1:5) पवित्र शास्त्र हमे यह सिखाती है, एक माँ के प्रेम से बढ़कर है हमारे यहोवा परमेश्वर का प्रेम,"क्या यह हो सकता है कि कोई माता अपने दूधपीते बच्चे को भूल जाए और अपने जन्माए हुए लड़के पर दया न करे? हां, वह तो भूल सकती है, परन्तु मैं तुझे नहीं भूल सकता"(यशायाह 49:15)।

मसीह में मेरी प्यारी बहनो,जो इस लेख को पढ़ रही हैं,हमे हमारे जीवन में यह  जानना जरूरी है, कि हम कौन है और हमे क्यों रचा गया। आप में से कई लोग किसी की बेटी, पत्नी और माँ होंगी। परमेश्वर आपसे बहुत प्यार करता है, क्योंकि आप उनकी अनमोल सृष्टि है।इस प्रकार का विचार न रखना कि हमारा जीवन व्यर्थ है। आओ हम हमारे पिता परमेश्वर के हाथो में खुद को सौंपे और  यहोवा का भय मानकर और  उनकी ईच्छा को पुरा करें और हमारे घरों को संवारे। जिनके लिए हमे चुना है।